छत्तीसगढ़ में ‘घास घोटाला’: 6 करोड़ का कैंपा फंड कागज़ों में हज़म — जंगलों के घास, वन्य प्राणियों का चारा तक नहीं बचा, वन अफसरों की मिलीभगत से ‘Grassland Development’ बना सबसे बड़ा घोटाला

छत्तीसगढ़ में ‘घास घोटाला’: 6 करोड़ का कैंपा फंड कागज़ों में हज़म — जंगलों के घास, वन्य प्राणियों का चारा तक नहीं बचा, वन अफसरों की मिलीभगत से ‘Grassland Development’ बना सबसे बड़ा घोटाला

bhandafodnews.com इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट

1. भूमिका : वन्य प्राणियों के चारे तक पर भ्रष्टाचार!

छत्तीसगढ़ के जंगलों में वन्य जीवों की सुरक्षा, चारा उपलब्ध कराना, उनके प्राकृतिक आवासों को मजबूत बनाना — यह सब सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है।
लेकिन हकीकत इससे एकदम उलट है।

वन विभाग के भ्रष्ट अधिकारियों की नज़र अब वन्य प्राणियों के चारे तक पर पड़ गई है।
CAF (Compensatory Afforestation Fund) के करोड़ों रुपए को Grassland / Pasture Development के नाम पर हजम कर लिया गया।

कागज़ों में घास बो दी गई, जुताई हो गई, बीज खरीद लिए गए।
लेकिन जमीन पर?
एक तिनका भी नहीं उगा।

bhandafodnews.com की जांच में यह घोटाला सामने आया कि लगभग 4518 हेक्टेयर में Grassland Development बताकर करीब 6 करोड़ रुपए कैंपा फंड से खर्च दिखा दिए गए, जबकि वास्तविकता में उस क्षेत्र में जुताई तक नहीं हुई।

इस रिपोर्ट में पूरे घोटाले का विश्लेषण, CAF Rules 2018, RTI जवाबों में हेराफेरी, अफसरों की मिलीभगत, राजनीतिक संरक्षण और जमीनी सच्चाइयों को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।

2. कैंपा फंड, CAF Rules और 80 प्रतिशत NPV — घोटाले के लिए ‘सही सोना खान’

CAF ACT 2016 और CAF Rules 2018 के अनुसार:

Rule 5(2) – Wildlife Habitat Improvement

CAF के तहत मिलने वाले NPV FUND का 80% वन्य जीवों के आवास सुधार पर खर्च किया जाना अनिवार्य है।
इसी प्रावधान का उपयोग कर छत्तीसगढ़ के विभिन्न डिवीज़नों में Grassland/Pasture Development (with seed sowing) जैसी मदों में भारी-भरकम बजट स्वीकृत किया गया।

सरकार के APO (Annual Plan of Operation) वर्ष 2024-25 के रिकॉर्ड के अनुसार:

वर्क नेचर: Grassland / Pasture Development

फिजिकल टारगेट: 4518 हेक्टेयर

खर्च दिखाया गया: ₹593.67 लाख (≈ 6 करोड़)

कागजों में हर चीज पूरी —
जुताई, बीज, ट्रैक्टर, मजदूरी, फेंसिंग, सीड शॉवर — सब कुछ।

लेकिन धरातल पर?

जंगल वैसा का वैसा, कहीं भी घास बोवाई का नामोनिशान नहीं।

3. घोटाले की विधि — कैसे हुआ 6 करोड़ का Grassland Fraud?

bhandafodnews.com की जांच में घोटाले के 6 प्रमुख चरण सामने आए:

3.1 फर्जी घास बीज खरीद

बीज का बाजार मूल्य ₹70–₹100 प्रति किलो

विभागीय बिलों में कीमत दिखा दी गई ₹250–₹450 किलो

लाखों रुपए सिर्फ कागजी खरीद में उड़ाए गए

अधिकतर मामलों में सप्लायर फर्जी, मोबाइल बंद, GST इनवॉइस संदेहास्पद पाए गए।

3.2 जुताई–बोवाई सिर्फ कागज़ों में

कागजों में ट्रैक्टर से 4518 हेक्टेयर की जुताई दर्ज।
लेकिन GPS या गूगल लोकेशन डेटा उपलब्ध नहीं।
RTI में जानकारी मांगी गई तो अधिकारी बोले:

> “जगह की जानकारी तृतीय पक्ष की है, नहीं दे सकते।”

 

यानी जंगल में घास बोए जाने की जगह तक गोपनीय बना दी गई!

3.3 मिडिलमैन व अफसरों की सांठगांठ

हर डिवीजन में:

DFO

ACF

फ़ील्ड स्टाफ

रेंजर्स

सभी लेयर में “कट” तय — यही अंदरूनी कर्मचारी बता रहे हैं।

3.4 पेमेंट प्रोसेस में हेरफेर

कागजी जुताई, कागजी बीज और कागजी मजदूरी के बाद
ई–मेजरमेंट बुक में फर्जी फोटो अपलोड।
कई मामलों में फोटो भी इंटरनेट से निकाले गए पाये गए।

3.5 जमीनी लूट + राजनीतिक संरक्षण

कई अधिकारियों ने 50–60 लाख खर्च कर पोस्टिंग कराई।
ऐसे अफसरों के चहेते नेताओं और RSS–BJP संगठन की मिलीभगत से:

> “जो आदमी पोस्टिंग में 50 लाख लगाता है, वो वसूली करके ही दम लेगा।”

 

ऐसी बातें RTI अपीली अधिकारियों तक करने लगे हैं!

4. RTI में खुली विभागीय सच्चाई — “हमारे अधिकारियों को परेशान मत करो”

RTI में जब जानकारी मांगी गई:

बीज कहां बोया?

कितने ट्रैक्टर लगे?

GPS मैपिंग कहाँ है?

किस दिन जुताई हुई?

किस मजदूर ने काम किया?

हर सवाल पर वन विभाग ने लिखा:

> “तृतीय पक्ष की जानकारी है, नहीं दे सकते।”
“जानकारी अस्पष्ट है।”
“अपीलीय अधिकारी की व्यस्तता के कारण उपलब्ध नहीं।”

 

और अपीलीय अधिकारी का जवाब:

> “क्यों परेशान करते हो यार हमारे अधिकारियों को?
वो बेचारे पहले से बहुत परेशान हैं।”

 

यह वक्तव्य खुद साबित करता है कि विभाग RTI के पारदर्शिता सिद्धांत से भाग रहा है।

5. ग्राउंड रिपोर्ट: जिन जगहों पर घास बोने का दावा, वहां एक तिनका नहीं

bhandafodnews.com टीम और स्थानीय शिकायतकर्ता अब्दुल सलाम क़ादरी के अनुसार:

अधिकारी अगर दावा करते हैं कि घास बोई गई है

तो हम उनसे Google Earth Pro का कच्चा डेटा मांगते हैं

उनसे कहते हैं – “हमारे साथ मौके पर चलिए”

लेकिन वन अफसर मौके दिखाने से बच रहे हैं।

क्यों?

क्योंकि:

> “कागज़ में बोवाई हो गई, जमीन में नहीं।”

 

6. विभागीय स्टाफ के बदले सुर — नोटों की बरसात का असर

जैसे ही Grassland Development के बिल पास हुए:

रेंजरों के सुर बदल गए

कई स्टाफ अचानक “सर–सर” चिल्लाने लगे

DFO तक के व्यवहार में बदलाव साफ

अंदरूनी सूत्र बताते हैं:

> “ग्रासलैंड का पैसा ऊपर तक गया है। इसलिए सब चुप हैं।”

 

7. वरिष्ठ अधिकारियों की निष्क्रियता — ‘राव साहब’ का डर

वन विभाग के बड़े अफसरों का नाम सामने आया, जिनमें कहा गया कि:

“राव साहब का बोलबाला सिर्फ छत्तीसगढ़ में नहीं, दिल्ली तक चलता है।”

“उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाया।”

“अब तो उनके रिटायर होने में 8 महीने बचे हैं।”

कई अधिकारियों के बयान:

> “शिकायत करोगे तो दिल्ली से छत्तीसगढ़ तक पहुंचते-पहुंचते 6 महीने लग जाएंगे।”
“अब कुछ होना जाना नहीं है।”

 

यह बताता है कि सिस्टम पर शीर्ष अधिकारियों का जबरदस्त दबदबा है।

8. वन्य प्राणियों पर खतरा: चारा तक नहीं बचा

Grassland Development का असली उद्देश्य:

जंगली हाथियों का चारा

हिरण, बारहसिंगा, गौर, सांभर

जंगलों में शिकार–पोसन क्षेत्रों को सुरक्षित बनाना

लेकिन जब:

घास बोई ही नहीं जा रही

चराई क्षेत्र बन नहीं रहे

तो यह वन्य प्राणियों के जीवन पर सीधा खतरा है।

> छत्तीसगढ़ के जंगलों के पशुओं का भविष्य अब भगवान भरोसे छोड़ दिया गया है।

 

9. CAF RULES की खुली धज्जियाँ

CAF Rules 2018 के अनुसार:

पारदर्शिता अनिवार्य

GIS/GPS डेटा अपडेट जरूरी

सोशल ऑडिट अनिवार्य

लोक निरीक्षण जरूरी

लेकिन छत्तीसगढ़ में:

न GPS डेटा

न लोकेशन

न सोशल ऑडिट

न निरीक्षण

न RTI जवाब

सब कुछ कागज–आधारित भ्रष्टाचार बन गया है।

10. घोटाले का परिमाण — सिर्फ 6 करोड़ नहीं, पूरा राज्य प्रभावित

4518 हेक्टेयर का Grassland सिर्फ एक वर्ष (2024–25) का काम है।
अगर पिछले 5 वर्षों का हिसाब देखें तो:

कुल Grassland Development लगभग 20,000 हेक्टेयर

औसत बजट लगभग 25–30 करोड़

यानी घोटाले की कुल राशि:

> 100–120 करोड़ तक पहुंच सकती है।

 

अगर जांच हो तो यह एक “वन विभाग का Vyapam-Level Scam” निकल सकता है।

11. जनता की आवाज़ दबाने का प्रयास

जो लोग शिकायत करते हैं, उन्हें:

धमकाया जाता है

अपमानित किया जाता है

RTI से मना किया जाता है

अपीलीय अधिकारी ताने मारते हैं

शिकायतकर्ता को ‘अनावश्यक झंझट करने वाला व्यक्ति’ कहा जाता है

यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।

12. bhandafodnews.com की मांग — हाई-लेवल जांच जरूरी

हम मांग करते हैं कि:

1. NPV फंड के Grassland Development की GIS आधारित जांच हो

2. हर हेक्टेयर का Google Earth Pro डेटा सार्वजनिक किया जाए

3. RTI जवाबों में लापरवाही पर धारा 20 की कार्रवाई हो

4. घोटाले में शामिल अधिकारियों को निलंबित किया जाए

5. CAG द्वारा विशेष ऑडिट कराया जाए

6. Wildlife Habitat Improvement का स्वतंत्र ऑडिट हो

13. निष्कर्ष : जंगल, वन्य प्राणी और जनता — तीनों के साथ धोखा

छत्तीसगढ़ के CAF फंड का उद्देश्य था:

जंगलों का संरक्षण

वन्य प्राणियों का चारा

प्राकृतिक आवास सुधार

लेकिन विभागीय भ्रष्टाचार ने इस पवित्र उद्देश्य को लूट का माध्यम बना दिया।

6 करोड़ रुपए कागज़ों में उड़ गए।
4,518 हेक्टेयर में घास बोने का दावा झूठा निकला।
RTI जवाबों में टालमटोल।
सीनियर अफसरों की चुप्पी।
राजनीतिक संरक्षण की बातें।
और वन्य प्राणियों का भविष्य दांव पर।

यह सिर्फ 6 करोड़ का घोटाला नहीं — यह जंगल और प्रकृति के साथ किया गया अपराध है।

bhandafodnews.com इस घोटाले की हर परत को उजागर करता रहेगा।

Leave a Comment

और पढ़ें

best news portal development company in india

Cricket Live Score

Corona Virus

Rashifal

और पढ़ें