छत्तीसगढ़ में राज्य CAMPA व्यवस्था पिछले एक वर्ष से ठप जैसी पड़ी है। आरोप है कि पूर्व CAMPA CEO रह चुके वरिष्ठ IFS अधिकारी श्रीनिवास राव ने अपने कार्यकाल में CAMPA के फंड और प्रक्रियाओं को इस कदर अव्यवस्थित किया कि आज स्थिति खस्ताहाल हो चुकी है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, जब श्रीनिवास राव CAMPA के CEO थे, तब राष्ट्रीय CAMPA प्राधिकरण (NCA) तक शिकायतों का ढेर लग चुका था। फंड नियोजन, टेंडर, फॉरेस्टेशन प्लान और अनुमोदन प्रक्रियाओं में अनियमितताओं की कई शिकायतें दर्ज की गई थीं।
इन्हीं शिकायतों के चलते—
➡️ वर्ष 2024-25
➡️ वर्ष 2025-26

के लिए राज्य द्वारा अनुमोदित APO के अधिकांश कार्यों को स्टियरिंग कमेटी ने आज तक स्वीकृति प्रदान नहीं की है।
इसके परिणामस्वरूप CAMPA की योजनाएँ रुकी हुई हैं—वन क्षेत्रों में कार्य प्रभावित हैं, श्रमिकों के भुगतान अटके हैं और वन प्रबंधन की गति ठप हो चुकी है।
छत्तीसगढ़ CAMPA में गड़बड़ियों का बड़ा खुलासा: DPR के अनुसार कार्य नहीं, पर अरबों की राशि खर्च—RTI जानकारी रोकने के गंभीर आरोप
छत्तीसगढ़ राज्य कैम्पा में बड़े पैमाने पर अनियमितता और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं। प्राप्त दस्तावेज़ों और टेक्स्ट समरी के मुताबिक, राज्य CAMPA द्वारा वर्ष 2020–21 से 2023–24 तक विभिन्न हेड्स में 1200–1500 करोड़ रुपये तक की राशि प्रस्तावित या खर्च दिखाई गई, जबकि ज़मीन पर अधिकांश कार्य या तो अधूरे हैं, या दिखाई ही नहीं देते।
सबसे गंभीर आरोप यह है कि अधिकारियों ने DPR के अनुसार कार्य नहीं कराया, लेकिन कैंपा फंड से राशि पूरी तरह आहरित की गई। न वृक्षारोपण की GPS लोकेशन उपलब्ध, न मस्टररोल, न बिल-व्हाउचर—सूचना मांगने पर विभाग RTI को ठुकरा देता है।
RTI में जानकारी रोकने के आरोप
शिकायतकर्ताओं के अनुसार,
> “RTI अपील अधिकारी सीधे कहते हैं कि PCCF श्रीनिवास राव ने निर्देश दिया है कि CAMPA की जानकारी बाहर नहीं जाना चाहिए।”
यह भी आरोप है कि कई मामलों में अपीलीय अधिकारी स्वयं स्वीकार करते हैं कि—
> “जो भी अपील आए, उसे निरस्त कर दिया करो। ऊपर से निर्देश है।”
सूचना आयोग तक भेजे गए मामलों में भी विभाग की ओर से “प्रभाव” डाला जाता है और मामला ख़ारिज होने की आशंका होती है।
वृक्षारोपण में भारी गड़बड़ी: 80% प्लांटेशन फेल
CAMPA के तहत:
रिवर बैंक प्लांटेशन = 100% फेल
अन्य प्लांटेशन = 70% से 80% फेल
फिर भी इंटर-सर्कल निरीक्षण में इन्हें 70–90% सफल बताया गया
स्थानीय लोगों का आरोप है कि
> “गोबर खाद, नीम खल्ली, मिट्टी बदलना, सिंचाई – कुछ नहीं होता। सिर्फ कागज़ पर काम होता है।”
लाखों पौधों की ‘कागज़ी खेती’
पौध उत्पादन और हाई-टेक नर्सरी के नाम पर करोड़ों के प्रस्ताव तो पास होते हैं, पर नर्सरियों की स्थिति बेहद खराब है।
आग बुझाने वाले ‘4129 फायर वॉचर’ सिर्फ कागजों में?
CAMPA से 200+ करोड़ फायर मैनेजमेंट पर खर्च दिखाया गया है, जबकि ग्राउंड पर फायर वॉचर नहीं मिलते, कुछ है तो वो CCF, DFO, SDO, रेंजरों व बड़े बाबू के आवास में बर्तन मांजते, कपड़ा धोते, भोजन बनाते, सब्जी लाते और तो और कुत्ता घुमाते दिख जाएंगे।
कैम्पा में भ्रष्टाचार के आरोप का केंद्र: पूर्व CEO वर्तमान वनबल प्रमुख एवं पीसीसीफ – व्ही श्रीनिवास राव
कई RTI आवेदकों और फॉरेस्ट कर्मचारियों का आरोप है कि
IFS श्रीनिवास राव ने कैम्पा व्यवस्था को अपने नियंत्रण में रखकर व्यापक गड़बड़ियों को जन्म दिया।
कल प्रकाशित होने वाली रिपोर्ट (भाग–2) में—
कैम्पा के ऐतिहासिक भ्रष्टाचार की फाइलें, राष्ट्रीय CAMPA प्राधिकरण तक पहुँची शिकायतें और करोड़ों की अनियमितताओं पर विस्तृत पड़ताल।
bhandafodnews.com के लिए अब्दुल सलाम कादरी की रिपोर्ट












