छत्तीसगढ़ कैंपा का ‘सॉयल–मॉइस्चर कंज़र्वेशन महाघोटाला’ Chhattisgarh CAMPA’s ‘soil-moisture conservation mega scam’

छत्तीसगढ़ कैंपा का ‘सॉयल–मॉइस्चर कंज़र्वेशन महाघोटाला’

तकरीबन 3,156 लाख रुपये के फर्जी कामों का खुलासा — 3477 स्ट्रीम्स में सिर्फ कागज़ी मरम्मत, फोटोशॉप्ड तस्वीरें और पुरानी संरचनाओं पर नया रंग–रोगन कर राशि आहरण**

bhandafodnews.com इन्वेस्टिगेशन रिपोर्ट

जंगलों को बचाने के नाम पर खुली लूट

छत्तीसगढ़ के जंगलों में जल–मिट्टी संरक्षण का उद्देश्य है बारिश के पानी को रोकना, मिट्टी कटाव रोकना, पशु–पक्षियों और वनस्पतियों के लिए दीर्घकालीन जल उपलब्ध कराना।
लेकिन वन विभाग के कुछ भ्रष्ट अफसरों के लिए यह उद्देश्य एक ऐसा ‘ATM’ बन गया है, जिसका उपयोग अनियमित बिलों, पुरानी संरचनाओं पर रंगाई–पुताई, और झूठी माप पुस्तकों के माध्यम से करोड़ों रुपये निकालने में किया जा रहा है।

वर्ष 2024–25 के लिए CAF Rules 2018 के तहत मिलने वाले Interest Amount (60% Interest Utilization under Rule 6(a)(vi)) में
3,156.25 लाख रुपये (≈ 31.5 करोड़)
का काम Maintenance of Soil & Moisture Conservation Works के नाम पर कराया गया बताया गया।

यह काम 3477 Streams पर होना था।
लेकिन वास्तविकता में:

कई स्थानों पर कोई काम नहीं हुआ

कई जगह पुराने स्ट्रक्चर पर मामूली मरम्मत कर ‘नई संरचना’ दिखा दी गई

कई जगह सिर्फ फोटोशूट के लिए पानी छोड़ा गया

रंग–रोगन करके नया काम बताया गया

और भारी रकम कागजों में उठाई गई

यह रिपोर्ट इस पूरी सच्चाई को उजागर करती है।

CAF Rules 2018 और Rule 6(a)(vi): घोटाले की असली खिड़की

CAF RULES के अनुसार:

Rule 6(a)(vi) — Soil & Moisture Conservation Works

इस मद में फंड का उपयोग

नालों की मरम्मत

चेकडैम की देखरेख

मिट्टी कटाव रोकने के उपाय

पुराने निर्माणों का रखरखाव

जल संरक्षण
में किया जाना होता है।

लेकिन छत्तीसगढ़ में हुआ क्या?

CAF Rules को कागज़ों की सजावट बनाकर अंधाधुंध राशि निकाली गई।
NABARD, CAG और केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय के दिशानिर्देशों की पूर्ण अवहेलना की गई।

3477 स्ट्रीम्स का घोटाला — कागज़ में मरम्मत, जमीन पर विनाश

विभागीय रिकॉर्ड में दिखाया गया:

Physical Targets: 3477 Streams

Expenditure: ₹3156.25 lakh

लेकिन bhandafodnews.com की जांच में पाया गया:

✔ कई जगह कोई संरचना अस्तित्व में ही नहीं, लेकिन मरम्मत का बिल पास

✔ कई जगह पुराने चेकडैम पर सिर्फ नया फोटो खींचकर अपलोड

✔ कई पुराने स्ट्रक्चर पर हल्का सीमेंट–स्लरी लगाकर “नया कार्य” बताया

✔ कई स्ट्रीम पूरी तरह प्राकृतिक, जिन पर मरम्मत संभव नहीं, फिर भी बिल पास

✔ कई जगह भौतिक सत्यापन तक नहीं किया गया

✔ कई लोकेशनों का GPS डेटा उपलब्ध ही नहीं

यह स्पष्ट दर्शाता है कि यह संगठित और योजनाबद्ध भ्रष्टाचार है।

काम कैसे हुआ? (या नहीं हुआ) – घोटाले की तकनीक

इस घोटाले में इस्तेमाल हुए प्रमुख तरीकों का खुलासा इस प्रकार है:

1. पुरानी संरचनाओं पर मरम्मत के नाम पर करोड़ों हजम

अधिकांश स्ट्रीम्स पर पुराने चेकडैम, लूज बोल्डर चेकडैम, स्टोन बांध पहले से मौजूद थे।

उन पर मामूली मरम्मत कर

कहीं-कहीं सिर्फ पुट्टी लगा कर

या फोटोशॉप से फोटो ठीक कर

और “नया कार्य” दिखाकर पूरे का पूरा बजट खा लिया गया।

 

2. फोटोशूट घोटाला — फोटो बदलकर नया काम साबित

टीम ने पाया कि कई डिवीज़नों में:

सूखे चेकडैम की तस्वीरें

पुराने फोटो

और इंटरनेट से लिए गए चित्र
को अपलोड किया गया है।

कई बार रात में टॉर्च की रोशनी में फोटो खींचकर ‘मौके पर उपस्थिति’ दिखाया गया।

3. माप पुस्तकों (MB) में फर्जी एंट्री

ई–मेजरमेंट बुक में:

तारीखें बदलकर लिखी गईं

एक ही लोकेशन को तीन–चार बार अलग नाम से दिखाया गया

गहराई, लंबाई, चौड़ाई का आंकड़ा झूठा

इससे लाखों रुपये एक ही संरचना पर दो–तीन बार आहरित किए गए।

4. स्ट्रीम्स का चयन मनमर्जी से — कोई वैज्ञानिक आधार ही नहीं

3477 Streams का चयन क्यों?
किस आधार पर?
किस तकनीकी समिति ने मंजूरी दी?

ना कोई रिपोर्ट
ना वैज्ञानिक सर्वे
ना भू-आकृतिक विश्लेषण
ना हाइड्रोलोजिकल रिपोर्ट

सिर्फ Excel Sheet में Streams की List, जिसमें कई स्ट्रीम अस्तित्व में ही नहीं।

RTI में विभाग की चोरी पकड़ी गई, तो अधिकारियों ने दिया— ‘तृतीय पक्ष’, ‘विशिष्ट जानकारी नहीं मांगी’ और ‘जानकारी उपलब्ध नहीं है’ जैसा जवाब

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि RTI में ये सवाल पूछे गए:

किस स्ट्रीम पर कार्य किया गया?

कार्य स्थल का GPS

किस तारीख को मरम्मत हुई?

किन मजदूरों ने काम किया?

फोटो की मूल कॉपी

ठेकेदार/वेंडर विवरण

किस अधिकारी ने सत्यापन किया?

लेकिन जवाब मिला:

> “जानकारी तृतीय पक्ष की है।”
“विशिष्ट जानकारी नहीं मांगी गई।”
“कार्यालय में उपलब्ध नहीं है।”

 

जब अपील की गई तो अपीली अधिकारी ने भी बिना जांच के
PDIO (Public Information Officer)
का पक्ष लिया और मामला निरस्त कर दिया।

अपीलीय अधिकारियों के चौंकाने वाले वक्तव्य — ‘हमारे अफसर वैसे ही क्षेत्रीय विधायक, नेता, पार्टी के मण्डल अध्यक्ष, मंत्री पत्रकार इत्यादि के बेगारी व्प आर्थिक बोझ से परेशान हैं, आप क्यों RTI लगाते हो?’

अपीली अधिकारी का बयान:

> “हमारे अधिकारी बेचारे इतने परेशान रहते हैं नेता–मंत्री के कारण… आप RTI लगाकर क्यों उन्हें और परेशान कर रहे हैं?”
“जानकारी लेकर आप क्या कर लोगे?”
“ऊपर तक सेटिंग है… आप कुछ नहीं बिगाड़ सकते।”

 

यह न केवल RTI ACT 2005 का खुला उल्लंघन है
बल्कि यह दिखाता है कि विभागीय स्तर पर भ्रष्टाचार की रक्षा कैसे की जा रही है।

DFO और CCF का सीधा बयान — “जानकारी लेकर भी कुछ नहीं कर सकते, ऊपर PCCF और मंत्रालय के अधिकारीयों सहित मंत्री तक सेटिंग है”

कई शिकायतकर्ताओं, RTI आवेदकों और पत्रकारों को विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने यह तक कहा:

> “आप जानकारी मांगकर हमारा क्या बिगाड़ लोगे?”
“ऊपर PCCF ऑफिस तक सब ‘सेट’ है।”
“हमारी पोस्टिंग आसान नहीं… ऊपर तक पैसा जाता है।”
“आप खबर छापोगे तो आपकी पत्रकारिता ही खत्म हो जाएगी।”
“लोग कहेंगे—छापते तो हो पर कार्रवाई कुछ नहीं होती।”

 

यह सीधे–सीधे धमकी, मनोवैज्ञानिक दबाव और पारदर्शिता से बचने का प्रयास है।

PCCF श्रीनिवास राव पर गंभीर सवाल — क्या वे भी भ्रष्टाचार में शामिल ?

bhandafodnews.com की टीम ने पाया:

पिछले 2 साल से लगातार CAF घोटाले उजागर हो रहे

कई RTI और शिकायतें PCCF ऑफिस तथा ACS ऋँचा शर्मा सहित मंत्री मान. केदार कश्यप तक पहुंचीं

कई बड़े घोटाले मीडिया में आए

पर एक भी बड़ी जांच या कार्रवाई नहीं हुई

यह सवाल उठता है:

क्या PCCF श्रीनिवास राव इस घोटाले में शामिल हैं?

यदि नहीं, तो उन्होंने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?

उनका मौन कई तरह के संदेह उत्पन्न करता है।

फील्ड स्टाफ का बयान — सब ऊपर तक जाता है

वनकर्मियों ने कहा:

> “आप सोचते हैं 3000 लाख का घोटाला सिर्फ नीचे होता है? नहीं सर… हिसाब ऊपर तक जाता है।”
“DFO–CCF सिर्फ बीच की कड़ी हैं… असली खेल ऊपर है।”
“हम कुछ नहीं बोल सकते… नौकरी चली जाएगी।”

 

यह दर्शाता है कि घोटाला सिर्फ जिला स्तर पर नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम में फैला है।

जंगल और पर्यावरण पर प्रभाव — विनाश की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़

सोचिए:

जहां 3477 स्ट्रीम्स में जल संरक्षण होना था

वहां कार्य कागज़ों में किया गया

न जल रुका

न मिट्टी संरक्षित हुई

न पेड़ों को लाभ मिला

न वन्यजीवों को पानी

यह सीधे-सीधे वन्यजीवों, पर्यावरण और भविष्य को खतरे में डाल देता है।


 

📌 नरवा योजना घोटाला — बीजापुर वनमंडल 📌

शिकायत के बाद जांच में खुलासा:
1 करोड़ 49 लाख रुपये की पूरी राशि आहरित पाई गई,
लेकिन मात्र 7 लाख कुछ हजार का ही कार्य धरातल पर मिला।

चौंकाने वाली कार्रवाई:
✔ करोड़ों की राशि की वसूली नहीं की गई
✔ मामले की जिम्मेदारी मृत रेंजर पर मढ़ दी गई
✔ प्रकरण को पुनः जांच हेतु नीचे भेजकर मामले का इतिश्री कर दिया गया

नरवा योजना में भ्रष्टाचार का यह उदाहरण सिस्टम की नाकामी को उजागर करता है।

——

bhandafodnews.com की मांग — हाईकोर्ट मॉनिटरड जांच हो

हम मांग करते हैं:

1. कैग से स्पेशल ऑडिट

2. 3477 Streams का GIS सत्यापन

3. CAF फंड की पिछले 5 वर्षों की जांच

4. RTI अधिकारियों पर धारा 20 की कार्रवाई

5. PCCF श्रीनिवास राव का स्पष्टीकरण

6. सभी भुगतान रोककर वैज्ञानिक समिति से पुनर्मूल्यांकन

वन, जल और मिट्टी — तीनों खतरे में; विभाग सो रहा है

छत्तीसगढ़ का यह घोटाला सिर्फ कागज़ी भ्रष्टाचार नहीं है।
यह जंगलों की हत्या है।
यह मिट्टी और पानी की बर्बादी है।
यह वन्यजीवों के आवास पर हमला है।
और सबसे गंभीर —
यह सिस्टम में फैले भ्रष्टाचार की आधिकारिक पुष्टि है।

जब विभाग ‘ऊपर तक सेटिंग’ की बात खुद स्वीकार करे,
जब RTI जवाबों में झूठ बोला जाए,
जब PCCF कार्रवाई न करें,
और जब करोड़ों का काम कागजों में पूरा दिखा दिया जाए—

तो यह सिर्फ घोटाला नहीं,
पर्यावरण का नरसंहार है।

bhandafodnews.com इस घोटाले को उजागर करने के अपने कर्तव्य पर हमेशा कायम रहेगा।

 

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